रौनक हल्ला नहीं करती। 17 सितंबर। रात। रामघाट। सेवा संकल्प। नाम: महाकाल सांस्कृतिक प्रस्तुति। जगह उज्जैन की है, भोपाल के मंच की नहीं।

कथा: श्री शैलेश लोढ़ा। विषय शीट का: उज्जैन की सांस्कृतिक गाथा, धार्मिक विरासत, गौरवशाली परंपरा। फिर भजन: श्री भवानी शास्त्री के नेतृत्व में। रामघाट भक्तिमय—विज्ञप्ति का वाक्य, भीड़ की गिनती नहीं।

जो किताब और जो शो हैं

विमोचन: ‘इतिहास के पृष्ठों से’। विषय: श्री महाकालेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व। आशीर्वाद का दीया: आतिशबाजी, लाइट शो, फायर शो। रंग-बिरंगी रोशनी, सांस्कृतिक प्रस्तुति, दीपों की जगमगाहट—उसी शाम का वातावरण।

शीट अंत में लिखती है: हजारों वॉलिंटियर्स; लाखों दीपों की रोशनी; शिप्रा तट एवं महाकाल लोक में एक साथ प्रज्ज्वलित दीप। रौनक “लाखों” को करोड़ या 33.27 नहीं बनाती। चित्र रामघाट कार्यक्रम का फ्रेम है।

मुख्य बातें

  • कथावाचन, भजन और पुस्तक विमोचन रामघाट की उसी शाम की पंक्ति हैं।
  • लाइट-फायर शो आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम की पंक्ति है, विश्व रिकॉर्ड की रसीद नहीं।
  • “लाखों दीप” शीट का शब्द है; संख्या इस विज्ञप्ति में नहीं है।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश जनसंपर्क · महाकाल सांस्कृतिक प्रस्तुति और कथावाचन ने मोहा मन ↗17 सितंबर 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 18 सितंबर 2026।

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